ब्याज दरें घटने की गुंजाइश नहीं: महंगाई RBI की कंफर्ट रेंज के ऊपरी लेवल के पास, कोविड से ग्रोथ पर दबाव बढ़ा तो रेट कट में दिक्कत होगी: मूडीज एनालिटिक्स


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5 घंटे पहले

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  • महंगाई में इजाफे की बड़ी वजह खाने-पीने के सामान का दाम बढ़ना है, खुदरा भाव वाले सूचकांक में 46% हिस्सा इन्हीं का होता है
  • खाने-पीने के सामान और ऑयल के दाम में उतार चढ़ाव होने से खुदरा महंगाई ने 2020 में कई बार 6% का ऊपरी लेवल पार किया

अगर कोविड के संक्रमण के मामलों में आए उछाल के चलते इकोनॉमिक ग्रोथ में कमी के आसार बनते हैं तो उसको सपोर्ट देने के लिए रिजर्व बैंक के पास रेट कट करने की गुंजाइश नहीं होगी। यह बात मूडीज एनालिटिक्स ने अपनी रिपोर्ट में कही है। RBI ने खुदरा महंगाई दर को 4% के 2% ऊपर और इतने ही नीचे यानी 2% से 6% के दायरे में रखना तय किया है, लेकिन यह पिछले छह महीनों से 4% से ऊपर बना हुआ है।

RBI के ऊपरी कंफर्ट लेवल के आसपास चल रही है महंगाई

खाने-पीने के सामान और ईंधन को छोड़ दें तो फरवरी में खुदरा मूल्य वाले सूचकांक से तय होने वाली कोर महंगाई का आंकड़ा 5.6% पर पहुंच गया जो महीने भर पहले 5.3% था। कुल मिलाकर खुदरा महंगाई फरवरी में पिछले साल के मुकाबले 5% रही थी जबकि जनवरी में यह आंकड़ा 4.1% था। फरवरी में खाने पीने के सामान में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.3% हो गई जो जनवरी में 2.7% थी।

पेट्रोल-डीजल और खाने-पीने के सामान के दाम में तेजी से बढ़ रही महंगाई

मूडीज एनालिटिक्स का कहना है कि महंगाई में इजाफे की बड़ी वजह खाने-पीने के सामान का दाम बढ़ना है। खुदरा भाव वाले सूचकांक में लगभग आधा यानी 46% हिस्सा इन्हीं का होता है। इस इकोनॉमिक रिसर्च फर्म के मुताबिक खाने-पीने के सामान और ऑयल के दाम में उतार चढ़ाव होने से खुदरा महंगाई ने 2020 में कई बार 6% का ऊपरी लेवल पार किया था। इसको देखते हुए कोविड के मामलों में उछाल के बीच RBI को ब्याज दरें कम रखने में मुश्किल हो सकती है।

खुदरा महंगाई ऊंचे लेवल पर रही तो RBI को ब्याज दर घटाने में दिक्कत होगी

मूडीज एनालिटिक्स के नोट के मुताबिक, ऑयल के दाम तेज रहने पर खुदरा महंगाई ऊंचे लेवल पर बनी रह सकती है और आने वाले समय में RBI को ब्याज दरों में कटौती करने में दिक्कत होगी। नोट में यह भी कहा गया है कि RBI महंगाई को 4% से 2% ऊपर और नीचे यानी 2% से 6% के बीच रखने का टारगेट 31 मार्च 2021 से आगे बढ़ा सकती है। सरकार असामान्य आर्थिक परिस्थितियों में RBI के लिए महंगाई के लिए टारगेट रेंज को ऊपर नीचे करने के लिए छोटे मोटे सुधार के बारे में सोच रही है।

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