मुंबई: दिमागी तौर से कमजोर आयुषी का शव 37 दिन बाद कब्र में मिला, परिजनों का पुलिस पर लापरवाही का आरोप


दिमागी रूप से कमजोर जिस आयुषी मजेठीया की तलाश में कुछ दिनों से मुंबई पुलिस गंभीरता दिखा रही थी, दरअसल पुलिस के इसी लापरवाही के चलते आयुषी उन्हें मृत अवस्था में मिली.

मुंबई की चेम्बूर पुलिस में आयुषी के अपहरण का मामला दर्ज किया गया था. 3 मई को चेम्बूर पुलिस को पता चला कि आयुषी की लाश 27 मार्च के दिन वसई के एक गांव में मिली थी. जिसका पोस्टमार्टम करने के बाद उसी दिन उसे दफना भी दिया गया था.

आयुषी कैसे हुई थी लापता?

आयुषी की मां गीता मजेठीया ने बताया था कि 25 मार्च को वो अपनी बेटी के साथ चेम्बूर के मंदिर गई थी और वापस आते समय वो लापता हो गई. जिसके बात उन्होंने उसकी तलाश हर जगह की पर कहीं पता नहीं चला जिसके बाद चेम्बूर पुलिस स्टेशन में मिसिंग की कंप्लेन लिखवाई.

भाई का आरोप पुलिस ने 17 दिन तक नहीं दाखिल की थी एफआईआर

आयुषी के भाई निशांत ने बताया कि चेम्बूर पुलिस ने शुरुवात में बहुत लापरवाही दिखाई. निशांत ने कहा कि, पुलिस एफआईआर तक रजिस्टर नहीं कर रही थी. निशांत ने पुलिस को बताया था की उनकी बहन की दिमागी हालात ठीक नहीं है उसका खास खयाल रखने की जरूरत पड़ती है. इसके बावजूद चेम्बूर पुलिस मामले दर्ज करने में आनाकानी करती रही.

जिसके बाद निशांत ने मुम्बई पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखा और तब जाकर उन्हें जॉइंट कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर से मुलाकात करने का मौका मिला. उनके आदेश के बाद चेम्बूर पुलिस ने 10 अप्रैल को आईपीसी की धारा 363 (अपहरण) के तहत अज्ञात शख्स के खिलाफ मामला दर्ज किया और जांच में तेजी लाई. निशांत ने बताया कि अगर पुलिस ने पहले ही मामला दर्ज किया होता और आयुषी को ढूंढने की कोशिश की होती तो उनकी बहन को बचाया जा सकता था.

जीआरपी की हेल्पलाइन किसी काम की नही

निशांत ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि आयुषी घर नहीं पहुची तो वो चेम्बूर पुलिस स्टेशन गए और तभी उनके एक दोस्त का फ़ोन आया उसने बताया कि उसने आयुषी को कुर्ला स्टेशन पर अंधेरी की ट्रेन पकड़ते देखा. फिर वो अचानक से गायब हो गई. जिसके बाद उसने जीआरपी की हेल्पलाइन पर फोन किया. स्टेशन मास्टर की मदद मांगी पर किसी से मदद नही मिली.

पुलिस ने उस समय कहा था कि!

चेंबूर पुलिस स्टेशन के सब इंस्पेक्टर अमोल कोलेकर ने बताया कि हमने करीब 500 सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच की और पाया कि लड़की ने गलती से एक बस पकड़ ली फिर उसे हमने शाम में कुर्ला स्टेशन के बाहर देखा. उस लड़की में फिर कुर्ला से सीएसटी जाने के लिए शाम 4 बजे के करीब लोकल ट्रेन पकड़ी और सीएसटी स्टेशन पहुंची.

उस लड़की ने फिर 4 बजकर 35 मिनट की पनवेल की ट्रेन पकड़ी और 5 बजकर 26 मिनट पर जब वो सानपाड़ा स्टेशन पहुंची तो ट्रेन में हंगामा करने लगी तभी वहां पर उसे एक महिला पुलिस कर्मी ने स्टेशन से बाहर निकालने की कोशिश की पर आयुषी ट्रेन से नहीं उतरी.

रेलवे पुलिस की एक और लापरवाही दिखाई दी

आयुषी के साथ नेरुल स्टेशन तक वो पुलिस कर्मी थी जब ट्रेन पनवेल स्टेशन पहुंची वो बेहोश हो गई. ट्रेन के यात्रियों ने पुलिस को जानकारी दी जब पुलिस वहां पहुंची तब उसे होश आया और पुलिस ने उसे छोड़ दिया.

आयुषी ने पनवेल स्टेशन से ही 6 बजकर 31 मिनट के आसपास की अंधेरी की ट्रेन पकड़ी थी और यात्रा के दौरान निशांत के दोस्त ने उसे पहचान लिया और उसका फोटो निकालकर उसके घर वालों को भेजा. बाद में 8 बजकर 8 मिनट पर आयुषी बांद्रा स्टेशन उतर गई और फिर से दूसरी ट्रेन पकड़कर 8 बजकर 16 मिनट पर सांताक्रुज स्टेशन उतरी.

वहां से उसने 8 बजकर 21 मिनट पर विरार जाने वाली ट्रेन पकड़ी औए कांदिवली उतर गई. वहां से फिर 8 बजकर 40 मिनट की दूसरी विरार ट्रेन पकड़कर कहां चली गई किसी को कुछ नहीं पता चल रहा था.

कैसे मिली आयुषी?

सूत्रों ने बताया कि चेम्बूर पुलिस जब मुंबई और आसपास के इलाकों में गुमशुदा और अज्ञात मृतकों का डाटा की जांच कर रही थी उसी दौरान उन्हें वसई के वालिव पुलिस स्टेशन से पता चला कि उनके यहां 27 मार्च को एक अज्ञात लड़की की लाश मिली थी ज़िसका एडीआर वालिव पुलिस स्टेशन मिली दर्ज किया गया था.

आयुषी की लाश कामन रोड रेलवे स्टेशन के पास एक पेड़ के नीचे मिला था. उस लड़की के कपड़े और रंग आयुषी से मिलता जुलता था जिसके बाद चेम्बूर पुलिस ने 3 मई को इस बात की जानकारी आयुषी के घर वालों को दी.

वसई पुलिस ने भी कुछ नहीं किया!

निशांत ने बताया जब वो उस जगह गए जहां आयुषी की लाश मिली थी तब उन्हें गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि उन्होंने आयुषी को घूमते हुए देखा था तब उन्होंने इस बात की जानकारी लोकल पुलिस को दी थी पर किसी ने कुछ नहीं किया.

आयुषी की मौत का क्या था कारण?

आयुषी की लाश मिलने के बाद उसका पोस्टमार्टम कराया गया और तब पता चला कि आयुषी की मौत हेपिटाइटिस की वजह से हुई.



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